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Shiv Trishul भगवान शिव को त्रिशूल किसने दिया और इसका नाम क्या है?
Shiv Trishul महादेव के अमोघ शस्त्र का पौराणिक रहस्य
भगवान शिव, जिन्हें हम महादेव और देवों के देव कहते हैं, उनके स्वरूप में त्रिशूल का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यह न केवल एक शस्त्र है, बल्कि सृष्टि के संतुलन का प्रतीक भी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शिव जी को यह त्रिशूल किसने दिया और इसका नाम क्या है?
1. भगवान शिव के त्रिशूल का नाम क्या है?
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, महादेव के इस शक्तिशाली शस्त्र का नाम मात्र “त्रिशूल” नहीं है। इसे विशेष रूप से के नाम से भी जाना जाता है। कुछ स्थानों पर इसे शिव का अमोघ अस्त्र कहा गया है जो तीनों लोकों की रक्षा और संहार करने में सक्षम है।
विजय (Vijay)
2. शिव जी को त्रिशूल किसने दिया? (उत्पत्ति की कथा)
शास्त्रों में त्रिशूल की उत्पत्ति के विषय में दो प्रमुख कथाएँ प्रचलित हैं:
- विश्वकर्मा द्वारा निर्माण: एक कथा के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने सूर्य की आभा (तेज) को कम करने के लिए उसे तराशा था। सूर्य के उसी दिव्य अंश से विश्वकर्मा ने तीन महान शस्त्र बनाए – भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, भगवान शिव का त्रिशूल और इंद्र का वज्र।
- स्वयंभू उत्पत्ति: कई पुराणों में यह भी उल्लेख है कि जब शिव प्रकट हुए, तो उनके साथ ही उनकी तीन शक्तियाँ – रज, तम और सत गुण भी प्रकट हुए। इन्हीं तीन शक्तियों के मेल से त्रिशूल का जन्म हुआ। अतः शिव और उनका त्रिशूल एक-दूसरे के पूरक हैं।
3. त्रिशूल के तीन फलक क्या दर्शाते हैं?
शिव के त्रिशूल के तीन नुकीले हिस्से (Prongs) ब्रह्मांड की तीन मुख्य अवस्थाओं को दर्शाते हैं:
- सृष्टि, स्थिति और विनाश: जन्म, पालन और अंत।
- तीन काल: भूत, भविष्य और वर्तमान।
- तीन दोष: वात, पित्त और कफ।
- तीन गुण: सत, रज और तम।
महत्वपूर्ण धार्मिक कड़ियाँ (Links)
त्रिशूल के बारे में और जानें (Wikipedia) चतुरासी जी – बहुभाषी लिरिक्स(ऊपर दिए गए लिंक नए टैब में खुलेंगे)
॥ त्रिशूलधारिणे नमः ॥
॥ जय भोलेनाथ ॥
॥ जय भोलेनाथ ॥


