Kurukshetra महाभारत युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र को ही क्यों चुना गया?

Kurukshetra
महाभारत युद्ध और कुरुक्षेत्र का चयन

Kurukshetra: महाभारत का युद्ध धर्म और अधर्म के बीच का महासंग्राम था। इस युद्ध के लिए कुरुक्षेत्र की भूमि का चयन करने के पीछे कई महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और रणनीतिक कारण थे।

1. धृतराष्ट्र की आध्यात्मिक बुद्धि

प्रचलित मान्यताओं के विपरीत, कुरुक्षेत्र का चयन धृतराष्ट्र द्वारा किया गया था। धृतराष्ट्र को आभास था कि पांडवों की शक्ति के आगे उनके पुत्रों का जीतना कठिन है। वे चाहते थे कि यदि उनके पुत्र युद्ध में मरें, तो इस पावन भूमि के प्रभाव से उन्हें ‘मुक्ति’ प्राप्त हो।

2. ब्रह्मा जी की यज्ञ स्थली

कुरुक्षेत्र वह स्थान है जहाँ सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया था। इस भूमि का कण-कण पवित्र माना जाता है। धृतराष्ट्र का मानना था कि यहाँ प्राण त्यागने से उनके पुत्रों के पाप धुल जाएंगे।

3. राजा कुरु का वरदान

राजा कुरु ने इस भूमि को अपने रक्त और पसीने से सींचा था। इंद्र देव ने उन्हें वरदान दिया था कि इस क्षेत्र में जो भी धर्म के लिए युद्ध करते हुए मरेगा, उसे सीधे स्वर्ग प्राप्त होगा।

कुरुक्षेत्र के विभिन्न पौराणिक नाम

प्राचीन ग्रंथों में कुरुक्षेत्र को केवल एक युद्ध भूमि नहीं, बल्कि अत्यंत पवित्र स्थान माना गया है। इसके अन्य नाम इस प्रकार हैं:

  • धर्मक्षेत्र: गीता के अनुसार यह धर्म की स्थापना की भूमि है।
  • ब्रह्मवेदी: यहाँ ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के दौरान यज्ञ किया था।
  • समंतपंचक: परशुराम जी के तर्पण से जुड़े होने के कारण इसे यह नाम मिला।
  • उत्तरवेदी: इसे देवताओं की उत्तर दिशा की वेदी भी कहा जाता है।
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ग्रंथ और संदर्भ (Sources)

  • श्रीमद्भगवद्गीता (प्रथम अध्याय): इसे ‘धर्मक्षेत्र’ के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • महाभारत (शल्य पर्व): राजा कुरु की तपस्या और इंद्र के वरदान का विस्तृत वर्णन।
  • वामन पुराण: कुरुक्षेत्र की भौगोलिक और आध्यात्मिक पवित्रता का उल्लेख।

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