
hum to terī śaraṇameṁ āye
श्री बालाजी गोविंदा – व्यंकटरमणा गोविंदा भजन (Tirupati Balaji Bhajan)
हम तो तेरी शरणमें आये, श्री बालाजी गोविंदा
लाज बचाओ आज हमारी, व्यंकटरमणा गोविंदा ॥धृ॥
दूर देशसे चलकर भगवन, तिरुपती हम आये है
आपके चरणोमें अर्पण करने, प्रेम भेट हम लाये है
हमको अपनी शरणमें लेलो, श्री बालाजी गोविंदा
लाज बचाओ आज हमारी, व्यंकटरमणा गोविंदा ॥1॥
गोविंद राजजीके दर्शन करके, तिरुमलै हम आये है
वेदशास्त्रकी महीमा सुनकर, पुष्करणीमें न्हाये है
वराहस्वामीजी की करी रे अर्चना, तेरे खातीर गोविंदा
लाज बचाओ आज हमारी, व्यंकटरमणा गोविंदा ॥2॥
प्रथम आपकी नगरीमें हम, सारे दर्शन पाये है
आपके दर्शन पाने को हम, धर्म की बारी लगाये है
उस बारीके पिंजरेमे हम, नाम रटे है गोविंदा
लाज बचाओ आज हमारी, व्यंकटरमणा गोविंदा ॥3॥
जैसे तैसे करके भगवान, आपके सन्मुख आये है
जरगुंडी जरगुंडी कहकर, हमको दूर हटावे है
मनकी आशा अधुरी रह गयी, तेरे खातीर गोविंदा
लाज बचाओ आज हमारी, व्यंकटरमणा गोविंदा ॥4॥
प्रभुजी तुम हो जगके ठाकुर, हम भी तुमसे मिला करे
इतनी सी है बिनती प्रभूजी, आपके दर्शन हुवा करे
सत्संग मंडल ने लिख दी हुंडी, आप स्विकारो गोविंदा
लाज बचाओ आज हमारी, व्यंकटरमणा गोविंदा ॥5॥


