Vijayadashami
विजयादशमी (दशहरा) – धर्म, भक्ति और असत्य पर सत्य की विजय का महापर्व

जय विजयदशमी Vijayadashami – अधर्म पर धर्म की शाश्वत विजय

शुभ दशहरा! सत्य, धर्म और भक्ति के इस महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं

विजयादशमी (दशहरा) केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि यह अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का अमर संदेश है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पावन पर्व संपूर्ण भारतवर्ष में बड़े ही श्रद्धा, उल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। इस दिन प्रभु श्री राम ने अहंकारी रावण का वध करके धर्म की स्थापना की थी, तथा माता दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर समस्त लोकों को अभय प्रदान किया था।

विजयादशमी के दो महान पौराणिक प्रसंग

1. प्रभु श्री राम की रावण पर विजय

त्रेतायुग में भगवान श्री रामचंद्र जी ने नौ दिनों तक मां शक्ति की आराधना की और दसवें दिन (विजयादशमी) लंकापति रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया। इसी स्मृति में हर वर्ष विजयादशमी पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन (रावण दहन) कर संदेश दिया जाता है कि बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में जीत सत्य की ही होती है।

2. मां जगदम्बा का महिषासुर मर्दिनी रूप

शास्त्रों के अनुसार, असुरराज महिषासुर के अत्याचारों से देवलोक को मुक्त कराने के लिए त्रिदेवों के तेज से भगवती दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां दुर्गा ने 9 दिनों तक महिषासुर से भीषण युद्ध किया और दशमी के दिन उसका वध कर दिया। इसी कारण मां भगवती को ‘महिषासुर मर्दिनी’ कहा गया और विजयादशमी का पर्व मां के विजयोत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

मैसूरु दशहरा (Mysuru Dasara) – भारत की भव्य सांस्कृतिक विरासत

दक्षिण भारत में विजयादशमी का पर्व अपनी भव्यता के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। विशेषकर कर्नाटक का **मैसूरु दशहरा** राजा-रजवाड़ों के ज़माने से चली आ रही परंपरा और अतुलनीय भक्ति का प्रतीक है। इस दिन मैसूरु महल को लाखों दीपों से सजाया जाता है और माता चामुंडेश्वरी की भव्य शोभायात्रा (जंबू सवारी) निकाली जाती है।

मैसूरु दशहरा उत्सव की विस्तृत जानकारी, कार्यक्रम और इतिहास जानने के लिए आधिकारिक वेबसाइट देखें: Mysore Dasara Official Website

भगवती मां दुर्गा की भक्ति और मनमोहक भजन

विजयादशमी और नवरात्रि के पावन अवसर पर मां जगदम्बा के भजनों का गायन और श्रवण करने से मन को परम शांति और ऊर्जा प्राप्त होती है। जब भक्त माता के चरणों में अपनी हाजिरी लगाते हैं, तो मां अपने बालकों के सारे दुख हर लेती हैं।

मां दुर्गा के प्रसिद्ध और भक्तिमय भजन के बोल (Lyrics) पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें: तूने मुझे बुलाया शेरावालिये – भजन लिरिक्स (Tune Mujhe Bulaya Bhajan Lyrics)

विजयादशमी के शुभ नियम और पूजा विधि

  • शमी पूजन (Shami Puja): विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। माना जाता है कि पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में ही छिपाए थे।
  • शस्त्र और वाहन पूजा (Aparajita & Shastra Puja): इस दिन अपराजिता देवी का पूजन किया जाता है और लोग अपने व्यवसायिक औजारों, वाहनों तथा अस्त्र-शस्त्रों की पूजा करते हैं।
  • विद्यारंभम् (Vidyarambham): दक्षिण भारत में विजयादशमी के दिन छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान कराने की परंपरा है, जिसे मां सरस्वती का आशीर्वाद माना जाता है।

© विजयादशमी भक्ति एवं सांस्कृतिक ब्लॉग | अधर्म पर धर्म की जय हो!

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