Chitrakoot – प्रभु श्री राम की पावन तपोभूमि |

Chitrakoot
चित्रकूट: जहाँ बसते हैं प्रभु श्री राम

Chitrakoot (चित्रकूट ): पावन भक्ति और शांति का धाम

जहाँ प्रकृति और आध्यात्म का अद्भुत मिलन होता है

जय श्री राम! भारत की पावन धरती पर कई ऐसे तीर्थ स्थल हैं जो हमें रामायण काल की याद दिलाते हैं। उन्हीं में से एक है चित्रकूट। चित्रकूट का अर्थ है—’अनेक आश्चर्यों की पहाड़ी’। यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि भक्ति की एक जीवित गाथा है।

“माना जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने अपने 14 वर्षों में से लगभग 11 वर्ष इसी पावन क्षेत्र में व्यतीत किए थे।”

Chitrakoot चित्रकूट की क्या विशेषता है?

चित्रकूट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। विंध्य पर्वतमाला के बीच बसा यह स्थान मंदाकिनी नदी के पवित्र तट पर स्थित है। यहाँ की विशेषता यह है कि यहाँ कदम-कदम पर आपको प्रभु राम के पदचिन्हों का अनुभव होगा। यह वही स्थान है जहाँ भरत जी, भगवान राम को वापस अयोध्या ले जाने के लिए आए थे और उनका मिलाप हुआ था।

दर्शन योग्य प्रमुख मंदिर

  • रामघाट: यहाँ शाम को होने वाली मंदाकिनी आरती मन को मोह लेती है।
  • हनुमान धारा: यहाँ पर्वत से गिरता शीतल जल हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श करता है।
  • कामदगिरि पर्वत: मान्यता है कि इस पर्वत की परिक्रमा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • स्फटिक शिला: यह वह पत्थर है जहाँ प्रभु राम और सीता जी विश्राम किया करते थे।

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