Vasant Panchami 2026 पर सरस्वती पूजन का सबसे सटीक समय और विधि।

Vasant Panchami

Vasant Panchami 2026: माँ सरस्वती की पूजा और ऋतुराज में स्वागत है|

Vasant Panchami -विद्या, कला और संगीत की देवी माँ शारदे को समर्पित पावन पर्व

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इसे ‘श्री पंचमी’ भी कहते हैं। इसी दिन ज्ञान और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। प्रकृति भी इस समय अपने सबसे सुंदर रूप में होती है, चारों ओर पीले सरसों के फूल और नई कोपलों के साथ ‘ऋतुराज बसंत’ का आगमन होता है।

बसंत पंचमी

ज्ञान की देवी माँ सरस्वती – कला और बुद्धि का आधार


Vasant Panchami 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी (शुक्रवार) को मनाया जाएगा।

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 22 जनवरी 2026, शाम 06:15 से
  • पंचमी तिथि समाप्त: 23 जनवरी 2026, रात 08:30 तक
  • सरस्वती पूजा का सटीक मुहूर्त: सुबह 07:12 से दोपहर 12:35 तक

सरस्वती पूजा विधि (Step-by-Step)

माँ सरस्वती की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। यहाँ सरल विधि दी गई है:

  1. स्वच्छता और वस्त्र: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
  2. स्थापना: उत्तर-पूर्व दिशा में एक चौकी बिछाएं, उस पर पीला कपड़ा डालें और माँ सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर रखें।
  3. अर्पण: माता को पीले फूल (खासकर गेंदा), पीले फल, और पीले चंदन का तिलक लगाएं।
  4. विद्या पूजन: छात्र अपनी पुस्तकें, कलम और वाद्य यंत्र माँ के चरणों में रखें।
  5. भोग: पीले चावल (केसरिया भात) या मालपुआ का भोग लगाएं।
  6. मंत्र जाप: “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें।
विशेषज्ञ की राय: “बसंत पंचमी ‘अबूझ मुहूर्त’ माना जाता है, यानी इस दिन बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह या गृह प्रवेश किया जा सकता है। यह दिन बच्चों के ‘अक्षरारंभ’ (शिक्षा की शुरुआत) के लिए सबसे उत्तम है।”

भक्ति और समर्पण

भारतीय संस्कृति में भक्ति का मार्ग अत्यंत निर्मल है। माँ सरस्वती की वंदना के साथ-साथ जब हम ईश्वर के प्रति समर्पण की बात करते हैं, तो मीरा बाई जैसी महान भक्त की याद आती है। उनके समर्पण के भाव को आप प्रसिद्ध भजन “बाला मैं वैरागण हूंगी” में गहराई से महसूस कर सकते हैं।


राज्यों के अनुसार अलग-अलग परंपराएं

राज्य मनाने का तरीका
पश्चिम बंगाल यहाँ ‘हाते खोड़ी’ की रस्म होती है, जहाँ छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाया जाता है।
पंजाब / हरियाणा आकाश में पतंगें उड़ाई जाती हैं और लोग पीले परिधान पहनकर उत्सव मनाते हैं।
राजस्थान पीले रंग की पगड़ी और साड़ियों का विशेष चलन है और माँ सरस्वती की भव्य पूजा होती है।
बिहार / उत्तर प्रदेश केसरिया भात बनाया जाता है और शिक्षा संस्थानों में सरस्वती वंदना की धूम रहती है।

निष्कर्ष

बसंत पंचमी का त्योहार हमें अज्ञानता से प्रकाश की ओर ले जाने का संदेश देता है। यह पर्व केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि हमारे कला, ज्ञान और संगीत को सम्मान देने का दिन है। मकर संक्रांति से शुरू हुई पर्वों की यह श्रृंखला हमें जीवन में उत्सव भरने की प्रेरणा देती है। (अधिक जानकारी के लिए देखें: संक्रांति का इतिहास)

॥ माँ सरस्वती आप सभी को सद्बुद्धि और ज्ञान प्रदान करें ॥

आप सभी को बसंत पंचमी की ढेरों शुभकामनाएँ!

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