
भगवान विष्णु की दिव्य तलवार: Nandaka
Nandaka भगवान श्री हरि विष्णु के चार प्रमुख आयुध—शंख, चक्र, गदा और पद्म—जग प्रसिद्ध हैं। परंतु, इनके अतिरिक्त नारायण के पास एक अत्यंत प्रतापी और संहारक अस्त्र भी है, जिसे ‘नंदक’ खड्ग (तलवार) कहा जाता है। यह दिव्य तलवार ज्ञान की शुद्धि और अज्ञान के विनाश का प्रतीक मानी जाती है।
Nandaka की उत्पत्ति और शक्ति
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब सृष्टि के आरंभ में असुरों का आतंक बढ़ा, तब देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने अपनी योगमाया से इस तलवार को प्रकट किया। ‘नंदक’ का अर्थ है “आनंद देने वाला”, परंतु यह आनंद केवल भक्तों के लिए है; दुष्टों के लिए यह काल के समान है।
दिव्य शक्ति: नंदक तलवार अमोघ है। कहा जाता है कि यह तलवार केवल लोहे की नहीं, बल्कि शुद्ध ‘ज्ञान’ (Knowledge) की ऊर्जा से बनी है। जैसे ज्ञान अज्ञान के अंधेरे को काट देता है, वैसे ही नंदक अधर्म और भ्रम का नाश करती है। अग्नि पुराण और विष्णु पुराण में इसे भगवान विष्णु के पांचवें प्रमुख अस्त्र के रूप में स्थान दिया गया है।
नंदक प्राप्ति का प्रसंग
श्रीमद्भागवत और अन्य पुराणों में उल्लेख मिलता है कि नंदक स्वयं नारायण की शक्ति का ही एक रूप है। जब-जब भगवान ने अवतार धारण किया, नंदक उनके साथ रही। विशेषकर कृष्ण अवतार के दौरान, नंदक का उल्लेख मिलता है जहाँ इसे अत्यंत तेज और चमक वाली तलवार बताया गया है, जिसकी चमक से शत्रु अंधे हो जाते थे।
शार्ंग धनुष और नंदक का संबंध
जहाँ श्री राम का मुख्य अस्त्र कोदंड था, वहीं मूल रूप से भगवान विष्णु के दिव्य धनुष को ‘शार्ंग’ कहा जाता है। नंदक तलवार और शार्ंग धनुष मिलकर भगवान की उस अपार शक्ति को दर्शाते हैं जो ब्रह्मांड के संतुलन को बनाए रखती है। वैष्णव परंपरा में, नंदक को तलवार के साथ-साथ भगवान के एक पार्षद (सेवक) के रूप में भी पूजा जाता है।


