
🪔 दीपावली (Diwali 2026): शुभ मुहूर्त, पूजन विधि एवं सम्पूर्ण पंचांग 🪔
कार्तिक मास का पावन पर्व Diwali 2026: यम दीपदान, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा एवं तुलसी विवाह का सम्पूर्ण मार्गदर्शन
शुभ दीपावली (Diwali 2026)! सनातन धर्म में दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला एक अद्भुत और अलौकिक उत्सव है। Diwali 2026 अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। कार्तिक मास की अमावस्या को भगवान श्री रामचंद्र जी चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात अयोध्या लौटे थे, जिसकी खुशी में नगरवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था।
वर्ष Diwali 2026 में दीपावली पर्व एवं इससे जुड़े सभी प्रमुख व्रतों और तिथियों (यम दीपदान, नरक चतुर्दशी, लक्ष्मी-गणेश पूजन, गोवर्धन पूजा तथा तुलसी विवाह) के शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी यहाँ प्रस्तुत है।
🔗 Diwali 2026 – महत्वपूर्ण भक्ति एवं पंचांग स्रोत (Important Links)
Diwali 2026 एवं अन्य त्योहारों के सटीक विवरण और भक्ति गीतों के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएँ:
📅 दीपावली (Diwali 2026) पंचपर्व एवं तुलसी विवाह की तिथियाँ
| पर्व / उत्सव | तिथि (Tithi) | दिनांक (Diwali 2026 Date) | मुख्य मुहूर्त / समय |
|---|---|---|---|
| धनतेरस एवं यम दीपदान | कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी | 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार) | सायंकाल 05:32 – 06:48 (दीपदान) |
| नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी | 8 नवंबर 2026 (रविवार) | अभ्यंग स्नान: प्रातः 05:41 – 06:38 |
| लक्ष्मी पूजन (Diwali 2026) | कार्तिक कृष्ण अमावस्या | 8 नवंबर 2026 (रविवार) | प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 05:54 – 07:50 |
| गोवर्धन पूजा / अन्नकूट | कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा | 10 नवंबर 2026 (मंगलवार) | प्रातः मुहूर्त: 06:38 – 08:49 |
| भैया दूज (यम द्वितीया) | कार्तिक शुक्ल द्वितीया | 10 नवंबर 2026 (मंगलवार) | अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 01:10 – 03:21 |
| तुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी/द्वादशी) | कार्तिक शुक्ल द्वादशी | 21 नवंबर 2026 (शनिवार) | सायंकाल तुलसी-शालिग्राम विवाह मुहूर्त |
🪔 1. यम दीपदान (धनतेरस – 6 नवंबर 2026)
Diwali 2026 के धनतेरस पर्व की शाम को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है।
पूजा विधि:
- घर के पुराने चौमुखी आटे या मिट्टी के दीपक में सरसों का तेल भरें और चार बत्तियाँ लगाएँ।
- दीपक में थोड़ी सी कौड़ी, सिक्का और काले तिल डालें।
- घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमदेव का ध्यान करते हुए दीप प्रज्वलित करें।
🌸 2. नरक चतुर्दशी एवं रूप चौदस (8 नवंबर 2026)
इसे ‘छोटी दिवाली’ (Diwali 2026 Chhoti Diwali) और ‘रूप चतुर्दशी’ भी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने भौमासुर (नरकासुर) का वध करके 16,100 कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था।
महत्व एवं विधि:
- अभ्यंग स्नान: सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तिल के तेल व उबटन (अटैल) का लेप लगाकर स्नान करने से रूप, सौंदर्य और आरोग्यता की प्राप्ति होती है।
- इस दिन यमराज के निमित्त तर्पण करने से पापों का नाश होता है और अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।
🪔 3. श्री लक्ष्मी-गणेश पूजन (Diwali 2026 – 8 नवंबर 2026)
Diwali 2026 की रात्रि सुख-समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य की देवी माँ लक्ष्मी तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की आराधना का परम पावन समय है।
पूजन की सरल विधि:
- पूजा स्थान को स्वच्छ करके लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ और माता लक्ष्मी व गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- कलश स्थापना करें और उसमें जल, दुर्वा, अक्षत, सुपारी और सिक्का डालें।
- माता लक्ष्मी को कमल का फूल, कौड़ी, कमलगट्टा, रोली, अक्षत और मिठाई (खीर/लासी) अर्पित करें।
- भगवान गणेश जी को मोदक और दूर्वा चढ़ाएँ।
- दीपक और धूप जलाकर श्री सूक्त, लक्ष्मी चालीसा एवं कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- आरती के पश्चात घर के हर कोने, तुलसी के पौधे और तिजोरी के पास दीपक रखें।
🏔️ 4. गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव (10 नवंबर 2026)
Diwali 2026 के मुख्य पूजन के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था।
पूजा विधि:
- घर के आंगन में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई जाती है।
- आकृति पर फूल, दूर्वा, खील और बताशे चढ़ाए जाते हैं और परिक्रमा की जाती है।
- इस दिन गायों की पूजा कर उन्हें गुड़ और हरा चारा खिलाया जाता है।
- अन्नकूट: भगवान को 56 भोग या विविध प्रकार की सब्जियों और अन्नों से बना भोग अर्पित किया जाता है।
🌺 5. तुलसी विवाह (21 नवंबर 2026)
Diwali 2026 उत्सव श्रृंखला के पश्चात् देवउठनी एकादशी के समय भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) और माता तुलसी का औपचारिक विवाह संपन्न कराया जाता है। इसके साथ ही सनातन धर्म में सभी मांगलिक एवं विवाह कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।
विवाह विधि:
- तुलसी के पौधे और गमले को दुल्हन की तरह सजाया जाता है। लाल चुनरी, रोली, सिंदूर और सुहाग सामग्री चढ़ाई जाती है।
- शालिग्राम जी को तुलसी जी के पास स्थापित करके हल्दी की रस्म और गठबंधन किया जाता है।
- विवाह के वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ तुलसी जी की सात परिक्रमा की जाती है।
- इस दिन तुलसी विवाह कराने से कन्यादान के समान महापुण्य की प्राप्ति होती है।
🎼 Diwali 2026 – भक्ति संगीत एवं सांस्कृतिक महिमा
Diwali 2026 का उत्सव केवल पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगीतमय भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का भी पर्व है। घर-घर में राम जी के आगमन के बधाई गीत गाए जाते हैं।
यदि आप भी Diwali 2026 के पावन अवसर पर प्रभु श्री राम और माता सीता की भक्ति में लीन होना चाहते हैं, तो विशेष भजनों और भजनों के बोल जैसे घम्मर घम्मर मारू लिरिक्स का आनंद लें। अधिक जानकारी और मुहूर्त विवरण हेतु आप टाइम्स ऑफ इंडिया Diwali 2026 रिपोर्ट भी देख सकते हैं।


