Bedara Kannappa – बेदारा कन्नप्पा 

Bedara Kannappa

बेदारा कन्नप्पा: शिव के प्रति अटूट भक्ति

बेदारा कन्नप्पा: शिव के प्रति अटूट भक्ति

बेदारा कन्नप्पा (Bedara Kannappa): हिंदू धर्म के इतिहास में बेदारा कन्नप्पा का नाम सर्वोच्च श्रद्धा के साथ लिया जाता है। दक्षिण भारत के 63 नयनारों में से एक, उनकी कहानी प्रमाण है कि ईश्वर केवल हृदय की शुद्धता के भूखे होते हैं।

बेदारा कन्नप्पा का परिचय

उनका जन्म एक शिकारी परिवार में हुआ था और नाम ‘थिन्ना’ था। विकिपीडिया के अनुसार, उनका जीवन भगवान कालहस्तीश्वर की सेवा के लिए समर्पित था। उनकी भक्ति एक बालक की सरलता जैसी थी।

भक्ति की अनूठी परंपरा

थिन्ना शिव को स्नान कराने के लिए मुँह में जल लाते थे। वे जो भी मांस या फल लाते, उसे पहले खुद चखते थे ताकि भगवान को सर्वश्रेष्ठ मिले। महादेव के लिए यह उनका निस्वार्थ प्रेम था।

महान बलिदान: आँखों का अर्पण

शिवलिंग की आँख से रक्त बहते देख थिन्ना ने अपनी एक आँख निकालकर वहाँ लगा दी। जब दूसरी आँख से रक्त बहा, तो उन्होंने अपना पैर शिवलिंग पर रखा ताकि सही जगह पहचान सकें। जैसे ही वे दूसरी आँख निकालने लगे, भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें थाम लिया।

कन्नप्पा नाम का महत्व

शिव ने उन्हें ‘कन्नप्पा’ (आँखें अर्पित करने वाला पिता) नाम दिया और उन्हें मोक्ष प्रदान किया।

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