Kurukshetra कुरुक्षेत्र में भोजन कौन तैयार करता था?

Kurukshetra
Kurukshetra युद्ध: भोजन व्यवस्था और उडुपी राजा की कथा

कुरुक्षेत्र युद्ध में भोजन व्यवस्था और उडुपी राजा की कथा

महाभारत युद्ध (कुरुक्षेत्र) भारत का प्राचीनतम और सबसे बड़ा युद्ध माना जाता है। इस युद्ध में करोड़ों सैनिक, विभिन्न राज्य और विशाल सेनाएँ शामिल थीं। एक आम प्रश्न यह है कि इतने विशाल जनसमूह के लिए प्रतिदिन भोजन का प्रबंध कैसे किया जाता था?

1. क्या महाभारत (वेद व्यास) में भोजन का विवरण मिलता है?

वेद व्यास द्वारा रचित महाभारत के मूल संस्कृत संस्करणों और आधुनिक ‘क्रिटिकल एडिशन’ में सैनिकों के भोजन की व्यवस्था या किसी विशेष राजा द्वारा पूरी सेना के लिए खाना बनाने का विस्तृत वर्णन नहीं मिलता है। यह विषय मूल ग्रंथ का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह बाद की क्षेत्रीय लोककथाओं और वाचिक परंपराओं के माध्यम से प्रसिद्ध हुआ है।

2. उडुपी राजा की कथा: एक लोकप्रिय लोककथा

एक अत्यंत लोकप्रिय दक्षिण भारतीय लोककथा के अनुसार, कुरुक्षेत्र युद्ध के समय की स्थिति कुछ इस प्रकार थी:

  • उडुपी के राजा ने युद्ध में हथियार उठाने के बजाय, दोनों पक्षों के सैनिकों के लिए भोजन का प्रबंध करने का प्रस्ताव रखा।
  • भगवान श्रीकृष्ण ने उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव को स्वीकार किया। इसके बाद राजा ने पांडवों और कौरवों, दोनों ओर के सैनिकों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी संभाली।
  • कथा की सबसे रोचक बात यह है कि हर दिन युद्ध में हजारों सैनिक वीरगति को प्राप्त होते थे, जिससे सैनिकों की संख्या घटती रहती थी। इसके बावजूद, उडुपी राजा के यहाँ कभी भी भोजन व्यर्थ नहीं जाता था और न ही कभी कम पड़ता था।

3. भोजन की सटीक गणना का रहस्य

लोककथाओं के अनुसार, राजा उडुपी को भगवान कृष्ण की ओर से एक गुप्त संकेत मिलता था। कहा जाता है कि कृष्ण रोज रात को उबली हुई मूँगफली खाते थे। राजा यह देखते थे कि कृष्ण ने कितनी मूँगफली छोड़ी है; उसी संख्या के आधार पर वे अनुमान लगा लेते थे कि अगले दिन कितने सैनिक जीवित बचेंगे। यह चमत्कारी प्रबंधन आज भी प्रबंधन (Management) के उदाहरण के रूप में सुनाया जाता है।

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4. आधुनिक संदर्भ और मान्यता

आज कई सांस्कृतिक लेखों, धार्मिक ब्लॉगों और स्थानीय परंपराओं में इस कथा का विशेष महत्व है। यद्यपि यह साहित्यिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी उडुपी (कर्नाटक) के व्यंजनों और वहां की पाक-कला की परंपरा को अक्सर इसी प्राचीन कथा से जोड़कर देखा जाता है।

5. निष्कर्ष

कुरुक्षेत्र युद्ध में भोजन प्रबंधन की यह कथा हमें सिखाती है कि रणभूमि में केवल शौर्य ही नहीं, बल्कि सेवा और करुणा का भी अपना स्थान होता है। भले ही यह मूल महाभारत में दर्ज न हो, लेकिन यह भारतीय संस्कृति की विविधता और कथा-साहित्य की समृद्धि को दर्शाती है।

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