Lord Krishna’s flute

Lord Krishna's flute

Lord Krishna’s flute : रहस्य, नाम और रोचक तथ्य

Lord Krishna’s flute भगवान श्रीकृष्ण और उनकी बांसुरी का अटूट संबंध है। जब भी कान्हा की छवि मन में आती है, उनके अधरों पर सजी बांसुरी की धुन का अनुभव स्वतः ही होने लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिव्य बांसुरी का नाम क्या है और यह उन्हें किसने दी थी?

1. भगवान श्रीकृष्ण की बांसुरी का नाम क्या है?

विभिन्न पुराणों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण की बांसुरी के कई नाम हैं, लेकिन सबसे प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

  • महानंदा (Mahananda): यह श्रीकृष्ण की सबसे मुख्य बांसुरी मानी जाती है।
  • आकर्षिणी (Akarshini): जो सबको अपनी ओर आकर्षित कर ले।
  • आनंदिनी (Anandini): जो सुनने वाले को परमानंद प्रदान करे।
  • वंशिका (Vanshika): बाँस से बनी होने के कारण इसे वंशिका भी कहा जाता है।

पुराणों का संदर्भ: श्रीकृष्ण की बांसुरी की महिमा का वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण और पद्म पुराण में विस्तार से मिलता है, जहाँ इसकी ध्वनि से जड़ और चेतन दोनों के मुग्ध होने की कथा है।

Lord Krishna’s flute

2. श्रीकृष्ण को बांसुरी किसने दी थी?

बांसुरी के आगमन को लेकर दो मुख्य पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं:

  • भगवान शिव द्वारा: एक प्रचलित कथा के अनुसार, जब भगवान शिव बाल कृष्ण के दर्शन करने गोकुल आए, तो वे उनके लिए एक उपहार लाना चाहते थे। उन्होंने दधीचि ऋषि की पवित्र हड्डी (या कुछ कथाओं में कल्पवृक्ष की लकड़ी) से एक बांसुरी बनाई और उसे कान्हा को भेंट किया।
  • देवराज इंद्र द्वारा: गोपाल तापनी उपनिषद (Gopal Tapani Upanishad) और कुछ अन्य ग्रंथों के अनुसार, इंद्र ने श्रीकृष्ण की स्तुति करते समय उन्हें दिव्य बांसुरी अर्पित की थी।

3. उपनिषदों में बांसुरी का महत्व

कृष्ण की बांसुरी का आध्यात्मिक रहस्य नाद बिंदु उपनिषद और गोपाल तापनी उपनिषद में मिलता है। यहाँ बांसुरी की ध्वनि को ‘ओम्’ (नाद ब्रह्म) का प्रतीक माना गया है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ती है।

4. श्रीकृष्ण की मृत्यु (स्वर्गारोहण) के बाद बांसुरी का क्या हुआ?

पौराणिक मान्यताओं और लोक कथाओं के अनुसार, जब श्रीकृष्ण का अवतार कार्य पूर्ण हुआ और वे वैकुंठ जाने के लिए तैयार हुए, तब उन्होंने अपनी बांसुरी के प्रति अपना अंतिम कर्तव्य निभाया:

ऐसा माना जाता है कि कृष्ण ने अपनी बांसुरी को राधा रानी को सौंप दिया था (सांकेतिक रूप से उनके प्रेम की स्मृति के रूप में)। एक अन्य मान्यता यह भी है कि अपनी देह त्यागने से पहले उन्होंने बांसुरी को झाड़ियों (निधिवन या प्रभास क्षेत्र के पास) में छोड़ दिया था, जिसका अर्थ था कि अब उनके जाने के बाद यह दिव्य संगीत शांत हो गया है। कुछ लोग मानते हैं कि वह बांसुरी उनके साथ ही अदृश्य रूप में वैकुंठ चली गई।

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