
पाप का भी बाप कौन है?
अक्सर समाज में हम गलत कामों को पाप कहते हैं। लेकिन कभी सोचा है कि हर पाप की शुरुआत कहाँ से होती है? वह कौन सी शक्ति है जो इंसान को गलत रास्ते पर धकेलती है? चलिए गहराई से समझते हैं।
1. लोभ (लालच) ही असली जड़ है
नीति शास्त्र में स्पष्ट कहा गया है: “लोभः पापस्य कारणम्”। इसका अर्थ है कि लालच ही सभी पापों का कारण है। जब मन में ‘और पाने’ की इच्छा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो इंसान झूठ, चोरी और हिंसा जैसे पाप करने से नहीं कतराता। इसलिए लालच को ही “पाप का बाप” कहा जाता है।
2. अहंकार का विनाशकारी रूप
लालच के बाद अगर कोई पाप को पालने वाला है, तो वह है ‘अहंकार’। अहंकार में अंधा होकर व्यक्ति खुद को भगवान समझने लगता है और दूसरों का अपमान या अहित करना उसके लिए आम बात हो जाती है।
3. अज्ञानता का अंधेरा
कभी-कभी हम यह नहीं जानते कि हमारे कर्मों का परिणाम क्या होगा। यह अज्ञानता ही पाप का आधार बनती है। सही शिक्षा और विवेक की कमी इंसान को पाप के दलदल में फंसा देती है।
निष्कर्ष
यदि हम अपने जीवन से लालच को निकाल दें और जो हमारे पास है उसमें खुश रहना सीखें, तो हम पाप की जड़ ही काट सकते हैं। अपनी नीयत साफ रखें, क्योंकि अंत में आपके कर्म ही आपकी पहचान बनते हैं।
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